पाटलीपुत्रा संसदीय चुनाव पर नजर।

कांग्रेस के सहारे धारी खानदान मैदान में उतरने की तैयारी।

सीटी न्यूज लाईव में अमित कुमार की रिपोर्ट।

पटना :- पालीगंज क्षेत्र में अपनी मजबूत पकड़ रखने वाले धारी परिवार राजनीति में अपनी विरासत को और मजबूत करने के लिए कांग्रेस के सहारे पाटलिपुत्र सीट पर दावेदारी कर सकती हैं। भरतपुरा – अलीपुर गढ़ से तालुक रखने वाले धर्मेंद्र धारी सिंह राजनीति में पूरी तरह से सक्रिय हैं। धर्मेंद्र धारी सिंह के बारे में कहा जाता है की कांग्रेस प्रमुख सोनिया गांधी की पुत्री प्रियंका गांधी क्लासमेट है साथ में दिल्ली में ही पढ़ाई-लिखाई की है इसी चलते गांधी परिवार से घरेलू रिश्ता है। इसलिए कांग्रेस की राजनीति में इन्हें खूब मन लगता है गांधी परिवार से मजबूत रिश्ता रहने के कारण ही लोगों की उम्मीद है धर्मेंद्र धारी कांग्रेस के टिकट पर पाटलिपुत्र चुनाव लड़ सकते हैं। क्षेत्र में पहले भी कांग्रेस के बैनर से अपनी उपस्थिति दर्ज करा दी है। वैसे धर्मेंद्र धारी रायबरेली लोकसभा का प्रभारी सहित उत्तराखंड का युवा प्रभारी रह चुके हैं। वहीं 1995 में कांग्रेस के टिकट पर पालीगंज असेंबली चुनाव भी लडा है।
जातीय समीकरण से भी हावी दिख रहे।
वैसे माने तो पाटलिपुत्र लोकसभा यादव बहुल क्षेत्र माना जाता है परन्तु भूमिहार जाति भी मत के दृष्टि दूसरे स्थान पर है। परिसमन के बाद पाटलिपुत्र निर्माण के बाद से ही मुख्य मुकाबला एनडीए गठबंधन और यूपीए गठबंधन के बीच रहा है पहली बार एनडीए से जदयू के रंजन यादव चुनाव जीते थे , दूसरी बार भाजपा के रामकृपाल यादव चुनाव जीते थे वहीं दोनों बार मुकाबला में राजद उम्मीदवार ही रहा हैं। इसलिए दोनों बार इस सीट से जीत और हार का फैसला यादव उम्मीदवारों के बीच ही हुआ है सीट निर्माण के बाद से हैं भूमिहार जाति के लोग उपेक्षित रहे हैं और कोई भी मुख्य पार्टी उम्मीदवार नहीं बनाई हैं। तरह तरह के राजनैतिक हवाओं से कांग्रेस नेताओं को उम्मीद है इस बार यूपीए गठबंधन में यह सीट कांग्रेस को मिलेगी। जैसे ही कांग्रेस के पाले में ऐसी आने की चर्चा होती है कांग्रेस नेता धर्मेंद्र धारी परिवारिक रिश्ता वह अध्यक्षा महोदय से सीधा संपर्क होने के नाते ए सीट से अपने पाले में लाने की उम्मीद रखते हैं। वैसे धारी खानदान का वर्चस्व इस क्षेत्र में अंग्रेजी हुकूमत से लेकर आज तक क्षेत्र में प्रतिष्ठा के दृष्टि से देखा जाता है। पर जैसे-जैसे चुनाव का दिन नजदीक आते जा रहा है वैसे ही गठबंधन और सीट की शेयरिंग बदलते जा रहा है वैसे इस सीट पर यूपीए गठबंधन में राजद की मजबूत पकड़ दिखती है क्योंकि इस सीट से लालू प्रसाद यादव और उनकी पुत्री मीसा भारती चुनाव लडी है। अभी की हालात देखकर लग रहा है कि अगर कोई बदलाव नहीं हुआ तो 2019 में होने वाले लोकसभा चुनाव में भी इस सीट पर दो यादव उम्मीदवारों के बीच मुकाबला होगी।

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