दशहरा : भारत में यहां है रावण का पैतृक गांव, होती है पूजा, नहीं जलाते पुतला

आज दशहरा का आयोजन लगभग पूरे देश में किया जा रहा है. इसको बुराई पर अच्‍छाई का प्रतीक माना जाता है. भगवान राम ने रावण का वध कर सीता को उनके चंगुल से छुड़ा लिया था. बुराई पर अच्छाई की इस जीत का जश्न पूरी दुनिया मनाती है और सीता को उठाने के कारण रावण के पुतले को जलाया जाता है. रावण के इसी कर्म के कारण उनको पूरे विश्व में राक्षस का कहा जाने लगा, लेकिन रावण बहुत बड़े विद्वान थे. वह शिव जी के बहुत बड़े भक्त थे. इसी वजह से भारत में कई जगहों पर उनके नाम के मंदिर हैं जहां रावण को भगवान मानते हैं.

आज भी देश में ऐसी एक नहीं कई जगह हैं जहां पर दशहरा इस रूप में नहीं मनाया जाता है. इतना ही नहीं कुछ जगह ऐसी भी हैं जहां पर रावण, मेघनाथ और कुंभकरण का पुतला तक जलाना निषेध है. इसके अलावा कुछ जगह ऐसी भी हैं जहां रावण की पूजा होती है और दशहरा वाले दिन उसके निधन पर शोक मनाया जाता है.

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