हाड़ौती में लहसुन के भावों ने किसानों को संकट में डाला

करीब 10 साल पहले हाड़ौती के किसानों को लहसुन के भावों ने जो सुखद अहसास कराया था वो अब किसानों के लिए बड़ा संकट बनकर सामने आ रहा है. इन दस बरसों के दौरान लहसुन का रकबा तो हाड़ौती में करीब 5 गुना बढ़ गया, लेकिन दाम जमीन पर ऐसे आकर गिरे कि अब किसान लहसुन की खेती से तौबा करने पर मजबूर हो रहा है. सरकार लहसुन की खरीद कर किसानों को राहत पहुंचाने का दावा तो कर रही है, लेकिन यह दावा ऊंट के मुंह में जीरे के समान साबित हो रहा है.

प्रदेश में लहसुन खरीदने के लिए सरकार ने ‘बाजार हस्तक्षेप योजना’ के तहत किसानों को राहत पहुंचाने के लिए खरीद अवधि में एक बार फिर इजाफा कर दिया है. अब हाड़ौती के 12 खरीद केन्द्रों सहित प्रदेश के 15 खरीद केन्द्रों पर 31 मई तक लहसुन की खरीद की जाएगी. लेकिन लहसुन खरीद केन्दों पर बीते एक महीने से चल रही खरीद की गति और गुणवत्ता का पैमाना सरकार की ओर से किसानों को दी जाने वाली राहत की मंशा को पूरा नही कर पा रहा है. अकेले हाड़ौती में 1.09 लाख हैक्टेयर में लहसुन का रकबा है और खरीद का लक्ष्य 1.54 लाख मैट्रिक टन रखा गया है. यानी 15 लाख क्विंटल लहसुन की खरीद की जानी है. लेकिन बीते एक माह के दौरान अब तक की खरीद में लक्ष्य के मुकाबले महज 2 प्रतिशत की खरीद हो पायी है. जबकि उत्पादन का आंकड़ा करीब 7.16 लाख मैट्रिक टन है.

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