आलू व्यवसाई मामले में एक गिरफ्तार जेल गया,परिजनों ने झूठे केश में फंसाने के लगाया आरोप

Reported by Amlesh Kumar Paliganj


पालीगंज: आलू व्यवसाई पर जानलेवा हमले के आरोपी को पुलिस ने भेजा जेल,परिजनों ने लगाया झूठे केश में फंसाने के आरोप ।
बीते 30 दिसंबर को पटना जिले के अनुमंडल मुख्यालय बाजार स्थित आलू व्यवसाई अशोक गुप्ता से पांच लाख की रंगदारी माँगने और उस जानलेवा हमले के आरोप में पुलिस ने इस घटना के 25 दिन बाद एक आरोपी राजकुमार साव को दूसरी बार गिरफ्तार कर कड़ी पूछताछ के बाद जेल भेज दिया ।वही परिजनों ने इस आरोप को सिरे से खारिज करते हुए राजनीतिक रूप उसे झूठे केश कर पुलिस द्वारा फसाए जाने का आरोप परिजनों ने लगाया है ।


उलेखनीय बात यह है की बीते माह 30 दिसम्बर की सुबह अनुमंडल बाजार स्थिति आलू व्यवसाई अशोक गुप्ता पर अपराधियों ने गोली मारकर जानलेवा हमला किया था ।जिनकी अभी भी पटना के एक निजी नर्सिंग होम ईलाज किया जा रहा है। वहीँ सनद रहे इससे कुछ दिन पहले अपराधियों ने 5 लाख की रंगदारी की भी माँग किया था साथ ही रँगदारी कि पैसे नही देने पर जान से हाथ धोने की धमकी भरा एक पर्ची एक बुलेट में लपेट कर दुकान में फेंक कर दिया था ।जिसके परिणामस्वरूप 5 लाख रँगदारी नही दिए जाने के बाद अपराधियों ने जानलेवा हमला किया था ।


इस घटना के 23 दिन बाद पुलिस ने दो दिन पहले 40 लाख रुपए की लेनदेन की और पैसे नही दिए जाने पर आलू व्यवसाई अशोक गुप्ता पर जानलेवा हमले करने की साजिश रचने की आरोप लगाते हुए पुलिस ने इसके विरुद्ध मामले दर्ज करते हुए एक आरोपी राजकुमार को उसके घर से दो दिन पहले उसके बेटे के सत्ताईसा के दिन देर शाम गिरफ्तार कर पूछताछ के बाद आज जेल भेज दिया ।वही आरोपी के भाई संजय कुमार ने इस आरोप को सिरे से खारिज करते कहा कि पुलिस ने उसके भाई को एक राजनीतिक रूप से साजिस के तहत झूठे केश दर्ज कर बेगुनाह को फसाने का काम किया है ।वही इस हाई प्रोफाइल मामले की वजह से दिनभर थाने में गहमागहमी का माहौल रहा ।वही इस बीच आरोपी के परिजन थाने परिसर में आरोपी को जेल जाते समय में रोते बिलखते रहे ।वही बाजार में सभी चाय की दुकानों और चौक चौराहों पर भी जगह जगह यही आज चर्चा आम देखी गई दबी जुबान से लगभग सभी ने इस युवक को बेगुनाह होने बात करते देखे गए ।
इस पूरे प्रकरण पर गौरतलब बात यह करने वाली है की आखिर अनुमंडल पुलिस को इस हाई प्रोफाइल आलू व्यवसाई अशोक गुप्ता से पांच लाख की रँगदारी माँगने और उसके बाद उसपर जानलेवा हमले की साजिश रचने की घटना के बाद लगभग एक माह बीत चुके होने के बाद भी अनुमंडल पुलिस को अबतक कोई ठोस कामयाबी नही मिलती दिखाई दे रही है ।एक गिरफ्तारी वो भी जैसे तैसे हुई ।जिसपर उंगलिया ही उठ रही है ।आखिर पुलिस को क्यों नही मिली कोई ठोस सबूत और सुराग ?इसका जबाब तो पुलिस के पास भी ठोस नही ,नहीं कोई ठोस सबूत ही मिली अबतक ।
इस पूरे प्रकरण पर गौर करने से एक बात यह सामने नहीँ की आखिर आलू व्यवसाई की जान की दुश्मन कौन हो सकता है ।उसके परिजनों और उसने अबतक कोई स्पष्ट किसी भी तरह की कोई सुराग नही दिया है ।वहीँ गिरफ्तार कर जेल भेजे गए राजकुमार और आलू व्यवसाई अशोक गुप्ता के बीच की गतिविधियों से एक बात सामने आई है कि दोनों के बीच आपसी सम्बंध रहे है ।इस बीच पैसे की लेनदेन की बात भी सामने आई ।दोनो के बीच बीसी खेलने के भी बाते सामने आई ।वही 38 लाख रुपए अशोक गुप्ता से राजकुमार की लेने बात भी सामने आई और इस बीच चार दिन पहले एक पंचायती भी होने की बात सामने लेकिन कोई भी परिणाम नही आया ।38 लाख के बदले 20 लाख की राशि पंचायती में फैसला हुआ जिसे देकर मामले की रफा दफा करने को कहा गया ।लेकिन 38 लाख रुपए या किसी तरह अन्य रकम लेने की बात से परिजनों ने इंकार किया और पैसे देने से इंकार कर दिया ।जिसके बाद बात नही बनी तो आनन फानन में थाने में प्राथमिकी दर्ज करवाई गई ।जिसके बाद यह सबकुछ सामने है ।अशोक गुप्ता के भाई दिलीप गुप्ता ने थाने में लिखित रूप से 38 लाख रुपए नही देने और जानलेवा हमले की साजिस रचने की आरोप लगाते हुए मामले दर्ज करवाए और उसके बाद पुलिस ने यह सब करवाई किया ।वही इससे पहले भी पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर कई दिनों तक पूछताछ किया था फिर कोई सबूत नही मिलने पर छोड़ दिया गया था ।


अब सवाल यह उठता है कि यह 38 लाख की लेनदेन की कोई ठोस सबूत नही है और न ही प्रमाण मिले ।इतनी बड़ी रकम की लेनदेन वो भी एक मामूली चुड़िहार के बेटे से यह बात कुछ हजम नही हो रही है ।यह रकम की कोई ठोस सबूत नही मिलने के एक स्पष्ट कारण है वह है कि दोनों के बीच बीसी के धंधे की चर्चा भी आम है ।जिसका कोई लिखित साक्ष्य या कोई ठोस प्रमाण लेनदेन की नही होती ।यह बात आखिर इतनी दिन से क्यों छुपाई गई ।जोकि गहन जांच का विषय है ।कहि बिलि का बकरा तो नहीं बनाया जा रहा हो ।या पर्दे के पीछे कोई साजिश रची जा रही हो ।इतने बड़े प्रकरणमें आखिर और कई लोग शामिल होंगे लेकिन आखिर पुलिस उसकी तह तक या उसकी उदभेदन करने में क्यों सफल नही हुई ।यह भी एक अलग ही रहस्य बना हुआ है । अब यह केस झूठे है या सच्चे इसकी फैसला तो अब कोर्ट में ही होगा ?

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