पालीगंज-रामचरितमानस कथा यज्ञ करने आये साधु ने अपनी कुटिया जलाई,आत्मदाह का किया प्रयास।

 

पालीगंज  :-अनुमंडल मुख्यालय थाने क्षेत्र के रानीपुर गाँव मे “रामचरितमानस कथा यज्ञ ” विगत दो माह से अयोध्या से आए एक साधु हेमंतदास ने बीती रात खुद ही अपने कुटिया में आग लगाकर अपनी खुदकुशी करने की प्रयास किया ।किसी ग्रमीणों आग बुझाकर कर साधु की जान बचाई और एक बड़े हादसे होने से बचाई ।


जानकारी के अनुसार विगत दो माह से आयोध्या आए एक साधु हेमंतदास ने प्रस्तावित अगले साल 24 अप्रैल से 4 मई तक 12 दिवसीय ‘रामचरितमानस कथा यज्ञ “करने तैयारियों में जुटे थे लेकिन ग्रामीणों द्वारा अपेक्षित सहयोग नही मिलने से वे कई दिनों से काफी क्षुब्ध रह रहे थे

जली हुई कुटिया

इसी बीच बीती रात हेमंतदास दास खुद अपनी कुटिया में कई ग्रामीणों के सामने आग लगा दी और उसमें खुद खुदकुशी करने की असफल प्रयास किया ।इस दौरान वही उपस्थित ग्रामीणों जलती हुई कुटिया से साधु को बाहर निकाल कर कुटिया में लगी आग को बुझाया ,लेकिन पुआल और झलासे से बनी कुटिया देखते ही देखते पल भर में जलकर पूरी तरह से नष्ट हो गई ।अगर समय रहते जलती कुटिया से साधु को बाहर निकाल कर एक बड़े हादसे होने से बचा लिया ।लेकिन इस हादसे में कुटिया के साथ उसमे रखे कुछ नगद ,दो मोबाइल ,एक साउंड बॉक्स और मशीन ,कपड़ा,समेत अन्य जरूरी सामान जलकर नष्ट हो गई ।जिसमें हजारों की सम्पति छति हुई ।
वही दूसरी ओर साधू हेमंतदास ने दो तरह विरोधाभासी बयान देते हुए एक तरफ कहा कि हमने खुद ही अपनी कुटिया में आग लगाया है और खुदखुशी करना चाहता था क्योंकि यहाँ के ग्रामीणों द्वारा हमे आहूत अपनी यज्ञ में सहयोग नही मिल रही थी जिसके कारण हम कई दिनों मानसिक तनाव में रह रहे थे ।जबकि दूसरी ओर साधु हेमंतदास ने दूसरी बयान में पलते हुए कहा कि ग्रामीणों कल देर शाम कुछ बाते हो रही थी कि इसी बीच अपनी कम्बल ओढ़ने की प्रयास कर रहा था उसी दौरान कुटिया में रखी जल रही एक दीपक में गलती से झटका लग गया और उससे आग लग गई ।जिसके बाद हम खुद खुदकुशी के लिए कुटिया में लगी आग के समक्ष बैठ गया ।लेकिन वहाँ इसबीच उपस्थित ग्रामीणों मुझे कुटिया से किसी तरह से बाहर निकाल कर मेरी जान बचाई ।
साधू हेमंतदास से अब आप कहा जाएंगे या क्या करेंगे इन सवालों पर कहा कि हम यहाँ से नही जाएंगे हम यहाँ से यज्ञ करवा कर ही जाएँगे ।हम इस यज्ञ के लिए दृढ़ संकल्पित है ।किसी भी सूरत में यज्ञ को सम्पन्न करवा कर ही यहाँ से जाएंगे ।

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