किसी के पिता तो कहीं कोच ने बदली किस्मत, जानिए इन होनहारों की ‘सफलता की कहानी’

वैसे तो हर वो शख्स आपका शिक्षक है, जिससे जीवन में कुछ भी सीखने को मिलता है। लेकिन हर किसी के जीवन में शिक्षक के रूप में एक ऐसी शख्सियत जरूर आई है, जिसने सबसे ज्यादा प्रभावित किया है। जिसकी शिक्षा और सुझावों ने कामयाबी का मार्ग प्रशस्त किया है। जिसकी शिक्षा से दूर और असंभव सी लगने वाली मंजिल भी आप पाने में कामयाब हो गए। आइये जानते हैं ऐसे ही शिक्षकों के बारे में, जिन्होंने पूरी ईमानदारी से अपनी जिम्मेदारी निभाई और शिष्यों को मुकाम तक पहुंचाया।

शिक्षक बन बेटे आयुष को भी ध्रुपद गायन का बनाया फनकार

अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त ध्रुपद गायक पंडित विनोद कुमार द्विवेदी अपने बेटे के ही शिक्षक बने। अपने बेटे आयुष को भी इसी विद्या का फनकार बना दिया। आयुष शहर के पहले ऐसे शख्स हैं, जिन्हें गायन के लिए केंद्र सरकार से स्कॉलरशिप मिली हो। आयुष कहते हैं कि वे सौभाग्यशाली हैं जो उनके पिता ने उन्हें शिक्षा दी। आयुष ने तीन साल की उम्र से ही संगीत सीखना शुरू कर दिया था। संगीत की प्रारंभिक शिक्षा मनोज श्रीवास्तव से ली एवं तबला राजकुमार त्रिपाठी से सीखा। ध्रुपद में विशेष रुझान होने के कारण उन्होंने अपने पिता को ही शिक्षक बना लिया और अभ्यास शुरू कर दिया। आयुष ने अपने पिता के साथ देश के बड़े-बड़े मंच साझा किए। कई रागों को आयुष ने पिताजी से मंच पर गाने के दौरान ही सीखे। आयुष बताते हैं गायन के उनके व्यक्तित्व से भी बहुत कुछ सीखने को मिला। उनका सरल स्वाभाव, उनके सिद्धांत सभी के लिए प्रेरणादायी हैं। आयुष को युवा ध्रुपद कलाश्री सम्मान मिल चुका है। इसके साथ ही देश के अनेक प्रतिष्ठित मंचों जैसे दिल्ली, चेन्नई, जालंधर, ऋषिकेष भोपाल आदि जगहों पर प्रतिभा का प्रदर्शन कर चुके हैं।

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