महान सम्राट अशोक की 2363 वीं जन्माष्टमी के अवसर पर निकाला गया शोभायात्रा

 

Reported by piyush dubey

अखण्ड भारत का फिर से निर्माण इस आयोजन का है मूल उद्देश्‍य : श्रीनाथ सिंह बौद्ध

बुद्ध शरण गच्छामि के नारों से गूंजा राजधानी पटना

पटना। सम्राट अशोक किला स्थान (कुम्हरार पार्क) से महान सम्राट अशोक की 2363 वीं जन्माष्टमी के पावन अवसर पर शोभा यात्रा का शुभारम्भ आज बौद्ध भिक्‍क्षुसंघ के बुद्ध बंदना एवं मंगल सूत्र पाठ से हुआ। बैण्ड बाजा के राष्ट्रीय धुन के साथ सम्राट अशोक का रथ गतिमान हुआ, उनके पीछे सैकड़ो बौद्ध भिक्‍क्षुसंघ तत्पश्चात विभिन्न विद्यालयों के छात्र/छात्रा देश के कोने-कोने से पधारे श्रद्धालु अतिथि, हजारों की संख्या में स्थानिय नागरिक सम्राट अशोक अमर रहे बुद्ध शरण गच्छामि, हमारा नारा-समता मैत्री, भाईचारा, चन्द्रगुपत मौर्य अमर रहे का नारा लगाते हुए चल रहे थे। शोभा यात्रा के दोनों तरफ समता सैनिक दल के जवान एवं स्वयं सेवक विधिव्यवस्था सम्भाले हुये थे। शोभा यात्रा का जगह-जगह स्थानीय नागरिक फूलों की वर्षां कर अपना उल्लास प्रकट कर रहे थे।

शोभा यात्रा दिन के एक बजे दारोगा प्रसाद राय पथ स्थित गौतम बुद्ध विहार आया। जहाँ तथागत् बुद्ध को नमन कर कार्यक्रम की समाप्ति हुयी। उक्त अवसर पर आगत अतिथियों के प्रति सम्मान प्रकट करते हुए संस्था के अध्यक्ष श्रीनाथ सिंह बौद्ध ने कहाँ कि इस कार्यक्रम के आयोजन का मूल उद्देश्य अखण्ड भारत का फिर से निर्माण करना है। देश में अमन चैन एवं सुख शांति के लिए समता मूलक समाज निर्माण हेतु बातावरण तैयार करना होगा। अपने सम्बोधन में श्री बौद्ध ने कहा कि मौर्य वंश के शासन काल में भारत विश्व गुरू के दर्जा के साथ ही सोने की चिड़िया कहा जाता था जब देश में आज जैसे संचार व्यवस्था एवं आवागमन के साधन नहीं थे तब इसी पटना से सम्पूर्ण एशिया शासित था, लोगों में आपसी भाईचारा एवं सहिष्णुता इस कदर थी कि किसी के घर में ताले नहीं लगते थे। सम्राट अशोक की नीतियों को अपनाकर ही हम फिर से विश्व गुरू बन सकते है।

कार्यक्रम प्रभारी एवं संस्था के महासचिव नागमणि कुशवाहा ने कहा कि देश का इतिहास लेखन में किये गये भेद भाव के कारण ही देश गुलाम हुआ, हमें फिर से सम्राट अशोक कालीन शासन व्यवस्था को अपनाना होगा जिससे आपसी सौहाद्र एवं शक्तिशाली राष्ट्र का निर्माण होगा। यदि हमें मौर्य कालीन व्यवस्था स्थापित करना है तो उस समय के रीति रिवाज एवं संस्कृति को फिर से स्थापित करना है तो उस समय के रीति रिवाज एवं संस्कृति को फिर से स्थापित करना होगा। आयोजन समिति की ओर से इस पावन अवसर पर अखण्ड भारत के समस्त नागरिकों को शुभ कामना व्यक्त करता हूँ। शोभा यात्रा में आयोजन समिति के उपाध्यक्ष ब्रजकिशोर सिंह कुशवाहा, महासचिव सह कार्यक्रम प्रभारी नागमणि कुशवाहा, कोषाध्यक्ष डाॅ. मुकेष कुमार अतिथि pappu कुशवाहा साथ ही हरिओम कुशवाहा, विधाधर कुशवाहा, सुरेश प्रसाद, जय प्रकाश मौर्य, जितेन्द्र कुशवाहा, राज कुमार कुशवाहा, डाॅ. विनोद कुमार कुशवाहा, मनोज कुशवाहा, मिथलेश कुशवाहा, अजित कुमार वर्मा, राजेश कुशवाहा, डा॰ अरविन्द्र कुमार, उपेन्द्र सिंह कुशवाहा आदि मुख्य रूप से उपस्थित थे, साथ ही अखिल भारतीय युवा कुशवावाहा समाज के सभी पदाधिकारी मौजूद रहे। उक्त अवसर पर सर्वसम्मति से एक प्रसताव पारित किया गया जिसमें पाटलिपुत्र विश्वविद्यालय से एक प्रस्ताव पारित किया गया जिसमें पाटलिपुत्रा विश्वविद्यालय का नामकरण सम्राट अशोक विश्वविद्यालय करने, गाँधी मैदान का नाम सम्राट असौक मैदान करने एवं जीरों माईल पर सम्राट अशोक की मूर्ति लगाने सम्बन्धी माँग प्रमुख है।

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